इंडिगो में अचानक बड़ा संकट: हजारों उड़ानें रद्द, क्या थी असली वजह? पढ़िए पूरी खबर
दिसंबर 2025 की शुरुआत में देश की सबसे बड़ी एयरलाइन IndiGo अभूतपूर्व संकट में फंस गई। एक ही झटके में हजारों उड़ानें रद्द हुईं, एयरपोर्ट पर अव्यवस्था बढ़ गई और लाखों यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। यह स्थिति भारतीय एविएशन इतिहास की सबसे बड़ी ऑपरेशनल गड़बड़ियों में से एक मानी जा रही है।
क्या हुआ : देश भर में एक साथ उड़ानें रद्द, एयरपोर्ट बने भीड़ के केंद्र
5 दिसंबर को IndiGo की 1,000 से अधिक उड़ानें कैंसिल होने की रिपोर्ट सामने आईं। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई सहित लगभग देश के हर बड़े हवाई अड्डे पर लंबी लाइने, देरी और गड़बड़ी दिखी। एयरलाइन की ऑन-टाइम परफॉर्मेंस (OTP) इतिहास में सबसे निचले स्तर पर गिर गई और कई जगहों पर मात्र 8–10% उड़ानें ही समय पर रवाना हो सकीं। यात्रियों की बढ़ती भीड़ को संभालने के लिए कई एयरपोर्ट्स पर अतिरिक्त सुरक्षा कर्मी तैनात करने पड़े।
कैसे हुआ यह संकट? जानिए तीन बड़ी वजहें
DGCA के नए FDTL नियमों ने बदला पूरा सिस्टम
नवंबर 2025 में DGCA ने क्रू के लिए नए Flight Duty Time Limitations (FDTL) लागू किए। इनका मकसद पायलटों को पर्याप्त आराम देना और थकान से होने वाली गलतियों को रोकना था। नए नियमों में शामिल थे: पायलटों के लिए 48 घंटे अनिवार्य विश्राम, जबकि पहले 36 घंटे थे, रात की उड़ानों की संख्या में कटौती, लगातार नाइट-ड्यूटी पर सख्त रोक और कुल ड्यूटी आवर्स में कमी. इन नियमों ने अचानक एयरलाइन के पूरे रोस्टर सिस्टम को बदलकर रख दिया।
IndiGo की रोस्टरिंग और प्लानिंग में भारी चूक
रोजाना 2,300+ उड़ानें चलाने वाली IndiGo को नए नियमों के बाद ज्यादा पायलटों और क्रू की आवश्यकता पड़ी। कई पायलट नए नियम लागू होने के कारण ड्यूटी पर उपलब्ध ही नहीं थे। रोस्टरिंग सॉफ्टवेयर में तकनीकी समस्याएं, क्रू मैनेजमेंट की कमी और बैकअप टीम न होना. इन सबने स्थिति को गंभीर बना दिया। एक-दो उड़ानें रद्द होते ही पूरा नेटवर्क "चेन रिएक्शन" की तरह ठप पड़ने लगा।
सर्दी और सीजनल भीड़ ने दबाव और बढ़ाया
दिसंबर महीना पहले ही शादी-वकेशन सीजन के कारण सबसे व्यस्त रहता है। कोहरे और खराब दृश्यता वाले शहरों में रनवे ऑपरेशन धीमे हुए। भारी ट्रैफिक के बीच देरी और रद्द उड़ानों की संख्या लगातार बढ़ती चली गई।
यात्रियों से लेकर एयरलाइन सेक्टर तक सब प्रभावित हजारों यात्री रातभर एयरपोर्ट पर फंसे रहे। होटल, भोजन और कैब की कमी से कई यात्रियों को गंभीर मुश्किलें झेलनी पड़ीं। टिकट रिफंड और री-शेड्यूलिंग को लेकर शिकायतों का अंबार लग गया। एविएशन इंडस्ट्री पर भरोसा डगमगाया और एयरलाइंस की तैयारी पर बड़े सवाल खड़े हुए। केंद्र सरकार ने स्थिति को आपातकालीन मानते हुए उच्च स्तरीय जांच शुरू की और 24×7 कंट्रोल रूम बनाया।
IndiGo ने प्रभावित यात्रियों को ऑटो-रिफंड देने का निर्णय लिया है। 5 से 15 दिसंबर के बीच यात्रा बुकिंग करने वालों के लिए री-शेड्यूलिंग शुल्क पूरी तरह माफ कर दिया गया है। DGCA ने अस्थायी राहत देते हुए कुछ FDTL नियमों को ढीला किया है, ताकि उड़ानें सामान्य हो सकें। एयरपोर्ट्स को स्टाफ बढ़ाने, सहायता डेस्क बनाने और भीड़ प्रबंधन की व्यवस्थाएं मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं।
तैयारी की कमी ने एयरलाइन इंडस्ट्री की कमज़ोरियों को उजागर किया
IndiGo का यह ऑपरेशनल संकट सिर्फ एक एयरलाइन की समस्या नहीं, बल्कि भारतीय एविएशन सिस्टम की तैयारियों का आईना भी है। नए नियम सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण थे, लेकिन उचित प्लानिंग और समय से तैयारी न होने के कारण यात्रियों को भारी कीमत चुकानी पड़ी।
यह घटना बताती है कि भविष्य में एयरलाइन संचालन को तकनीकी, मानव संसाधन और नीतिगत बदलावों के लिए और बेहतर ढंग से तैयार रहने की जरूरत है।